पटाखा बाजारों में दोहरा रवैया? कहीं लाइसेंस और सुरक्षा की सख्ती, तो कहीं कथित अवैध कारोबार!
नूतन चौक, चांटीडीह, मोपका, उसलापुर और तिफरा में बिना लाइसेंस दुकानें संचालित होने की शिकायत; रिवर व्यू में कमिश्नर का औचक निरीक्षण, बुधवारी बाजार का निरीक्षण अभी बाकी
अनिल शुक्ला की रिपोर्ट
बिलासपुर। दीपावली का पर्व नजदीक आते ही बिलासपुर शहर सहित जिलेभर में पटाखों का बाजार पूरी तरह सज चुका है। अधिकृत लाइसेंस लेकर कारोबार करने वाले पटाखा व्यापारी निर्धारित सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का पालन करते नजर आ रहे हैं। खासकर नगर निगम क्षेत्र के रिवर व्यू और रेलवे क्षेत्र स्थित बुधवारी बाजार में लाइसेंसधारी व्यापारियों ने सुरक्षा व्यवस्था के साथ अपनी दुकानें सजाई हैं। लेकिन दूसरी तरफ शहर के कई इलाकों में बिना लाइसेंस पटाखा दुकानें संचालित होने की शिकायत सामने आ रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि नियमों का पालन करने वाले व्यापारियों पर ही प्रशासनिक और विभागीय सख्ती क्यों दिखाई दे रही है, जबकि कथित अवैध कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई कब होगी?
इन इलाकों में बिना लाइसेंस दुकानें संचालित होने की शिकायत
पटाखा व्यवसाय संघ की ओर से शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बिना लाइसेंस दुकानें संचालित होने की शिकायत की गई है। इनमें नूतन चौक सरकंडा, रपटा पुल चांटीडीह रोड, शनिचरी बाजार, मोपका क्षेत्र, उसलापुर रोड और तिफरा रोड प्रमुख रूप से शामिल हैं। व्यापारियों का आरोप है कि इन स्थानों पर कुछ दुकानदार बिना अधिकृत लाइसेंस और निर्धारित सुरक्षा इंतजामों के पटाखों का कारोबार कर रहे हैं। यदि यह शिकायत सही है तो यह न केवल लाइसेंसधारी व्यापारियों के साथ असमानता है, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।
रिवर व्यू में कमिश्नर का औचक निरीक्षण, बुधवारी बाजार की जांच बाकी
पटाखा बाजारों की व्यवस्था को लेकर नगर निगम कमिश्नर ने आज रिवर व्यू में लगे पटाखा बाजार का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने दुकानों की व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया। व्यापारियों को निर्देश दिए कि सुरक्षा व्यवस्था में जहां भी कमी है, उसे तत्काल दूर करें और किसी भी स्थिति में लापरवाही न बरतें।
इस निरीक्षण के दौरान पटाखा व्यवसाय संघ के अध्यक्ष सुनील बाजपेयी ने कमिश्नर को लिखित शिकायत सौंपकर शहर के अन्य क्षेत्रों में कथित रूप से बिना लाइसेंस संचालित पटाखा दुकानों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का मुद्दा उठाया। कमिश्नर ने संबंधित जोन कमिश्नर को जांच कर उचित कार्रवाई करने के निर्देश देने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि मामला गंभीर होने पर एडीएम को जानकारी देकर आवश्यक कार्रवाई कराई जाएगी।
हालांकि आज का औचक निरीक्षण केवल रिवर व्यू बाजार तक सीमित रहा। रेलवे क्षेत्र स्थित बुधवारी बाजार का निरीक्षण अभी बाकी है। ऐसे में दोनों प्रमुख बाजारों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक निगरानी और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
लाइसेंसधारी व्यापारियों से सीजनल जीएसटी की मांग, छोटे कारोबारियों ने उठाए सवाल
पटाखा बाजार में एक और नया विवाद जीएसटी विभाग की जांच और सीजनल जीएसटी पंजीयन को लेकर सामने आया है। जानकारी के अनुसार जीएसटी विभाग के सर्किल इंस्पेक्टर द्वारा रिवर व्यू और बुधवारी बाजार के पटाखा व्यवसायियों तथा संघ पदाधिकारियों से संपर्क कर अस्थायी सीजनल जीएसटी पंजीयन लेने के लिए कहा जा रहा है।
इस पर पटाखा व्यवसाय संघ के अध्यक्ष का तर्क है कि वे सड़क किनारे निर्धारित स्थान पर लाइसेंस लेकर सीमित अवधि के लिए छोटा कारोबार करते हैं। उनका व्यवसाय मुश्किल से तीन से चार दिन चलता है। ऐसे में उनके कारोबार का आकार और लागत जीएसटी पंजीयन की निर्धारित सीमा के दायरे में नहीं आती तो केवल कुछ दिनों के कारोबार के लिए सीजनल जीएसटी नंबर लेना उनके लिए व्यावहारिक कैसे होगा?
व्यापारियों का कहना है कि एक तरफ लाइसेंस लेकर नियमों के अनुसार कारोबार करने वालों से जीएसटी पंजीयन की अपेक्षा की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ कथित रूप से बिना लाइसेंस दुकानें संचालित करने वालों पर विभागीय निगरानी और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में छोटे लाइसेंसधारी कारोबारियों को ही बार-बार विभागीय प्रक्रिया में उलझाने का आरोप लगाया जा रहा है।
16 स्थायी लाइसेंसधारियों के जीएसटी कारोबार की भी हो जांच
जीएसटी विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर व्यापारियों ने एक और महत्वपूर्ण सवाल उठाया है। विभागीय जानकारी के अनुसार बिलासपुर जिले में पटाखों के 16 स्थायी लाइसेंसधारी व्यापारी हैं, जिनका कारोबार पूरे वर्ष चलता है। ऐसे में इन स्थायी लाइसेंसधारियों के कारोबार और जीएसटी अनुपालन की स्थिति भी सार्वजनिक होनी चाहिए।
व्यापारियों की मांग है कि जीएसटी विभाग स्पष्ट करे कि इन 16 स्थायी लाइसेंसधारियों में से कितने व्यापारियों की जांच की गई है, कितनों के खिलाफ जीएसटी संबंधी कार्रवाई हुई है, कितने मामलों में जांच लंबित है और विभाग ने किस प्रकार के दिशा-निर्देश जारी किए हैं। साथ ही यह भी बताया जाना चाहिए कि पटाखा कारोबार से विभाग को सालाना कितना जीएसटी राजस्व प्राप्त होता है।
पटाखों पर लागू जीएसटी की दर, संबंधित वस्तुओं की कर श्रेणी और वास्तविक कर भुगतान की स्थिति के संबंध में भी विभाग को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। केवल छोटे सीजनल कारोबारियों से पंजीयन की बात करने के बजाय बड़े और स्थायी कारोबारियों के कर अनुपालन की स्थिति भी समान रूप से जांच के दायरे में आनी चाहिए।
हादसे के बाद जांच नहीं, पहले हो समान नियम और सख्त निगरानी
पटाखों का कारोबार अत्यंत संवेदनशील है। यहां छोटी सी लापरवाही भी बड़ी आगजनी और जनहानि का कारण बन सकती है। ऐसे में जिला प्रशासन को सभी एसडीएम क्षेत्रों में पटाखा बाजारों की जांच के लिए अलग-अलग निगरानी टीमें गठित करनी चाहिए। इन टीमों को लाइसेंस, अग्निशमन उपकरण, दुकानों के बीच सुरक्षित दूरी, विद्युत व्यवस्था और अन्य निर्धारित सुरक्षा मानकों की नियमित जांच की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।
जिला कलेक्टर और अतिरिक्त कलेक्टर को भी अपने अधीनस्थ अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी करने की आवश्यकता है कि नियमों का पालन केवल रिवर व्यू और बुधवारी जैसे कुछ चुनिंदा बाजारों तक सीमित न रहे। बिना लाइसेंस दुकान संचालित करने वालों पर भी कार्रवाई हो और लाइसेंसधारी व्यापारियों के साथ समान व्यवहार किया जाए।
सवाल सिर्फ पटाखा कारोबारियों के मुनाफे या नुकसान का नहीं, बल्कि हजारों लोगों की सुरक्षा का है। यदि समय रहते प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन विभाग और जीएसटी विभाग ने अपने-अपने दायित्वों का निष्पक्षता से निर्वहन नहीं किया तो किसी बड़ी घटना के बाद जांच और जिम्मेदारी तय करने की औपचारिकता ही शेष रह जाएगी।





